भारत की स्वतंत्रता का संघर्ष दुनिया के सबसे लंबे और शांतिपूर्ण आंदोलनों में से एक है। लगभग 200 वर्षों तक ब्रिटिश शासन के खिलाफ चले आंदोलन ने देश को आज़ादी दिलाई। यह आंदोलन कई चरणों से होकर गुजरा।

1. प्रारंभिक चरण (1857–1905)
1857 का विद्रोह भारत का पहला संगठित स्वतंत्रता संग्राम था। इसे सैनिकों, किसानो और आम जनता का व्यापक समर्थन मिला। यद्यपि यह असफल रहा, लेकिन इसने स्वतंत्रता की चिंगारी जलाई।
1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई, जो स्वतंत्रता संघर्ष का मुख्य राजनीतिक मंच बनी।
2. बंग-भंग और स्वदेशी आंदोलन (1905–1915)
1905 में लॉर्ड कर्ज़न द्वारा बंगाल विभाजन किया गया। इसके विरोध में राष्ट्रव्यापी स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ। विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा इस आंदोलन की प्रमुख विशेषताएँ थीं।
3. गांधी युग की शुरुआत (1915–1930)
मोहनदास करमचंद गांधी दक्षिण अफ्रीका से लौटकर भारत आए और स्वतंत्रता आंदोलन में अहिंसा और सत्याग्रह का मार्ग अपनाया।
- चंपारण आंदोलन (1917)
- अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918)
- खेडा आंदोलन (1918)
1920 में असहयोग आंदोलन शुरू किया गया जिसने स्वतंत्रता के संघर्ष को जन आंदोलन में बदल दिया।
4. सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930–1934)
इस चरण की शुरुआत गांधीजी के प्रसिद्ध दांडी मार्च से हुई, जिसमें उन्होंने नमक कानून तोड़ा। इस आंदोलन ने ब्रिटिश सरकार की जड़ें हिला दीं।
5. भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
8 अगस्त 1942 को गांधीजी ने “करो या मरो” का नारा दिया। यह आंदोलन सबसे व्यापक, शक्तिशाली और निर्णायक साबित हुआ। लाखों भारतीय जेल गए, लेकिन संघर्ष जारी रहा।
6. स्वतंत्रता और विभाजन (1947)
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश शासन कमजोर हुआ। लंबे संघर्ष, त्याग और राजनीतिक वार्ताओं के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र राष्ट्र बना। हालांकि, विभाजन ने देश को गहरी चोट दी, लेकिन आज़ादी ने नई शुरुआत का मार्ग खोला।