भारत कृषिप्रधान देश रहा है। यहाँ की सभ्यता और संस्कृति कृषि पर आधारित रही है। समय के साथ भारतीय कृषि में कई बड़े परिवर्तन हुए—पारंपरिक खेती से लेकर हरित क्रांति और आधुनिक स्मार्ट खेती तक।
प्राचीन और मध्यकालीन कृषि
सिंधु घाटी सभ्यता में ही उन्नत कृषि पद्धतियाँ मिलती हैं। सिंचाई तकनीक, पशुपालन और बहुउद्देश्यीय फसलें यहाँ सामान्य थीं। मध्यकाल में भी कृषि भूमि को जलाशयों, तालाबों और नहरों के माध्यम से सिंचाई दी जाती थी।

औपनिवेशिक काल की चुनौतियाँ
ब्रिटिश शासन ने स्थायी बंदोबस्त, जमींदारी व्यवस्था और भारी कर प्रणाली लागू की, जिसका असर किसानों पर नकारात्मक पड़ा। खेती पर निवेश कम हुआ और उत्पादकता घटने लगी।
स्वतंत्रता के बाद कृषि सुधार
स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने कृषि सुधार की कई योजनाएँ शुरू कीं—
- भूमि सुधार
- सहकारी समितियाँ
- सिंचाई बांध और नहरें
- कृषि विश्वविद्यालयों की स्थापना
- उर्वरक और HYV बीजों का उपयोग
हरित क्रांति (1966–1975)
भारत में कृषि क्रांति का सबसे बड़ा चरण हरित क्रांति था। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आधुनिक तकनीक वाली खेती लागू की गई।
विशेषताएँ—
- उन्नत बीज (HYV)
- रासायनिक उर्वरक
- कीटनाशक
- ट्रैक्टर और मशीनों का उपयोग
- सिंचाई व्यवस्था में सुधार
इसके परिणामस्वरूप भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना।
आधुनिक कृषि – तकनीक आधारित खेती
आज कृषि क्षेत्र में तकनीक की भूमिका बहुत बढ़ गई है। किसान नई मशीनों और वैज्ञानिक तरीकों से खेती कर रहे हैं—
- ट्रैक्टर, हार्वेस्टर
- ड्रिप इरिगेशन
- पॉलीहाउस
- जैविक खेती
- मृदा परीक्षण
स्मार्ट खेती क्या है?
स्मार्ट खेती में डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जाता है, जैसे—
- ड्रोन → फसल सर्वेक्षण और छिड़काव
- IoT सेंसर → मिट्टी की नमी, तापमान और पोषक तत्वों की निगरानी
- मोबाइल ऐप → मौसम पूर्वानुमान, बाजार मूल्य
- AI आधारित निर्णय → सही समय पर पानी, उर्वरक और कीटनाशक
स्मार्ट खेती के लाभ
- लागत में कमी
- उत्पादन में वृद्धि
- पानी और उर्वरक की बचत
- फसल की गुणवत्ता में सुधार
- जोखिम प्रबंधन आसान