खनिज संसाधन किसी भी देश की आर्थिक प्रगति और औद्योगिक विकास की रीढ़ माने जाते हैं। पृथ्वी के गर्भ में पाए जाने वाले ये प्राकृतिक पदार्थ मानव जीवन के लगभग हर क्षेत्र में उपयोगी हैं। खनिज संसाधनों में लोहा, कोयला, तांबा, बॉक्साइट, अभ्रक, चूना पत्थर, मैंगनीज आदि शामिल हैं, जिनका उपयोग उद्योगों, ऊर्जा उत्पादन, निर्माण कार्य और दैनिक जीवन की वस्तुओं के निर्माण में किया जाता है।

भारत खनिज संपदा से समृद्ध देश है और विशेष रूप से झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में खनिजों की भरपूर उपलब्धता पाई जाती है। खनिज संसाधन दो प्रकार के होते हैं—धात्विक और अधात्विक खनिज। धात्विक खनिजों से धातुएँ प्राप्त होती हैं, जबकि अधात्विक खनिजों का उपयोग सीमेंट, कांच और रासायनिक उद्योगों में किया जाता है। हालांकि खनिज संसाधन सीमित होते हैं, इसलिए उनका संरक्षण और संतुलित उपयोग अत्यंत आवश्यक है। यदि खनन कार्य वैज्ञानिक तरीके से न किया जाए तो इससे पर्यावरण प्रदूषण, वन विनाश और भूमि क्षरण जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। अतः सतत विकास के लिए खनिज संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।