सरकार ने संसद में सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया है, जिसका उद्देश्य देश की बीमा व्यवस्था को अधिक व्यापक, आधुनिक और सुलभ बनाना है। यह विधेयक बीमा क्षेत्र में सुधारों को तेज करने के साथ-साथ हर नागरिक तक वित्तीय सुरक्षा पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार ने वर्ष 2047 तक सार्वभौमिक बीमा कवरेज का लक्ष्य निर्धारित किया है।
वर्तमान में भारत में बीमा कवरेज का स्तर कम है और इसका आकार सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 3.7 प्रतिशत तक सीमित है। बीमा बाजार में जीवन बीमा का प्रभुत्व है, जबकि स्वास्थ्य, कृषि और सामान्य बीमा जैसे क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में बीमा सेवाओं की कमजोर पहुंच भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
इस विधेयक के तहत बीमा अधिनियम 1938, एलआईसी अधिनियम 1956 और IRDAI अधिनियम 1999 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का प्रावधान किया गया है, जिससे पूंजी निवेश और प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, नेट ओन्ड फंड की सीमा को घटाकर नए खिलाड़ियों के लिए बाजार में प्रवेश को आसान बनाया गया है। नियामक संस्था IRDAI को स्वामित्व, प्रबंधन और पॉलिसीधारकों की सुरक्षा से जुड़े अधिक अधिकार दिए गए हैं।
हालांकि, इस विधेयक को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। इसमें संयुक्त बीमा लाइसेंस की व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे एक ही कंपनी द्वारा विभिन्न प्रकार के बीमा प्रदान करने की सुविधा नहीं मिलती। नए बीमाकर्ताओं के लिए ऊंची पूंजी शर्तें और वितरण व्यवस्था में सीमित लचीलापन भी आलोचना का विषय है। इसके बावजूद, यह विधेयक भारत में बीमा क्षेत्र को अधिक मजबूत और समावेशी बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।